Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.158.d45-d46: दूसरे लोग कर्म को प्रत्यक्ष देखकर यही मानते हैं कि सबकी प्रवृत्ति भाग्य से नहीं, बल्कि पुरुषार्थ से होती है। ये दो बातें हैं। इनमें मेरा मन भ्रमित हो जाता है; अतः हे महादेव! मुझे सत्य बताइए। यह सुनने के लिए मेरी बड़ी जिज्ञासा है। | mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दूसरे लोग कर्म को प्रत्यक्ष देखकर यही मानते हैं कि सबकी प्रवृत्ति भाग्य से नहीं, बल्कि पुरुषार्थ से होती है। ये दो बातें हैं। इनमें मेरा मन भ्रमित हो जाता है; अतः हे महादेव! मुझे सत्य बताइए। यह सुनने के लिए मेरी बड़ी जिज्ञासा है।
Other people, after seeing the action directly, believe that everyone's inclination is due to effort and not by destiny. These are two aspects. My mind gets confused in these; hence Mahadev! Tell me the truth. I am very curious to hear this.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥