Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.158.d31-d32: श्री महेश्वर बोले- देवी! मैं तुम्हें सार बात बता रहा हूँ, इसे एकाग्र होकर सुनो। जो लोग अचानक मरकर फिर कहीं और जन्म ले लेते हैं, उनका पुराना अभ्यास या संस्कार कुछ समय तक बना रहता है। | mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीमहेश्वर उवाच
तदहं ते प्रवक्ष्यामि शृणु तत्त्वं समाहिता॥
ये मृता: सहसा मर्त्या जायन्ते सहसा पुन:।
तेषां पौराणिकोऽभ्यास: कंचिद् कालं हि तिष्ठति॥
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले- देवी! मैं तुम्हें सार बात बता रहा हूँ, इसे एकाग्र होकर सुनो। जो लोग अचानक मरकर फिर कहीं और जन्म ले लेते हैं, उनका पुराना अभ्यास या संस्कार कुछ समय तक बना रहता है।
Shri Maheshwar said- Devi! I am telling you the essence of the matter, listen to it with concentration. Those people who die suddenly and then suddenly take birth somewhere else, their old practice or sanskar remains for some time.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥