Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.158.d3: श्री महेश्वर बोले - हे महात्मन! ऐसा भी होता है कि शुभ संकल्पों के बल पर मनुष्य दूसरों के हित के लिए उन्हें दुःख देकर भी सुख प्राप्त कर सकता है।   |   mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]  »  श्लोक d3
 
 
श्लोक  13.158.d3 
श्रीमहेश्वर उवाच
तदप्यस्ति महाभागे अभिसंधिबलान्नृणाम्।
हितार्थं दु:खमन्येषां कृत्वा सुखमवाप्नुयात्॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले - हे महात्मन! ऐसा भी होता है कि शुभ संकल्पों के बल पर मनुष्य दूसरों के हित के लिए उन्हें दुःख देकर भी सुख प्राप्त कर सकता है।
 
Shri Maheshwar said - O great one! It also happens that with the power of good intentions, a man can achieve happiness even by causing pain to others for their benefit.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)