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mahabharat 13.158.d29: ज्ञानी पुरुष द्वारा किया गया थोड़ा सा भी धर्म महान हो जाता है, और अनजाने में किया गया महान धर्म भी निष्फल हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]  »  श्लोक d29
 
 
श्लोक  13.158.d29 
अल्पमात्रं कृतो धर्मो भवेज्ज्ञानवता महान्।
महानपि कृतो धर्मो ह्यज्ञानान्निष्फलो भवेत्॥
 
 
अनुवाद
ज्ञानी पुरुष द्वारा किया गया थोड़ा सा भी धर्म महान हो जाता है, और अनजाने में किया गया महान धर्म भी निष्फल हो जाता है।
 
Even a little bit of Dharma (righteousness) done by a knowledgeable person becomes great, and even a great Dharma (righteousness) done unknowingly becomes fruitless.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)