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mahabharat 13.158.d28: जिस प्रकार वायु बादलों को तितर-बितर कर देती है, उसी प्रकार वेदों से प्राप्त ज्ञान काम, क्रोध, भय, अहंकार और बौद्धिक अज्ञान को शीघ्र ही दूर कर देता है।   |   mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]  »  श्लोक d28
 
 
श्लोक  13.158.d28 
कामं क्रोधं भयं दर्पमज्ञानं चैव बुद्धिजम्।
तच्छ्रुतं नुदति क्षिप्रं यथा वायुर्बलाहकान्॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार वायु बादलों को तितर-बितर कर देती है, उसी प्रकार वेदों से प्राप्त ज्ञान काम, क्रोध, भय, अहंकार और बौद्धिक अज्ञान को शीघ्र ही दूर कर देता है।
 
Just as the wind disperses the clouds, similarly the knowledge obtained from the Vedas quickly dispels lust, anger, fear, pride and intellectual ignorance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)