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mahabharat 13.158.d24: वेदों के माध्यम से ही यज्ञ आदि अनुष्ठानों का सूत्रपात होता है। यज्ञ के फल के संयोग से संसार की समृद्धि बढ़ती है।   |   mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]  »  श्लोक d24
 
 
श्लोक  13.158.d24 
यज्ञादीनां समारम्भ: श्रुतेनैव विधीयते।
यज्ञस्य फलयोगेन देवलोक: समृद्‍ध्यते॥
 
 
अनुवाद
वेदों के माध्यम से ही यज्ञ आदि अनुष्ठानों का सूत्रपात होता है। यज्ञ के फल के संयोग से संसार की समृद्धि बढ़ती है।
 
It is through the Vedas that rituals like Yagya etc. are initiated. The prosperity of the world increases due to the combination of the results of the yagya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)