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श्लोक  13.158.d2 
परेषां विप्रियं कुर्वन् यथा सम्प्राप्नुयाच्छुभम्।
यदेतदस्मिंश्चेद् देहे तन्मे शंसितुमर्हसि॥
 
 
अनुवाद
इस शरीर में स्थित आत्मा दूसरों का अहित करके भी शुभ फल कैसे प्राप्त करती है? कृपया मुझे यह बताइए।
 
How does the soul in this body get auspicious results even after doing harm to others? Kindly tell me this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)