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mahabharat 13.158.d19: जब ब्रह्मांड के रचयिता भगवान ब्रह्मा को इस अंधकार को नष्ट करने का कोई उपाय नहीं सूझा तो उन्होंने कठोर तपस्या शुरू कर दी।   |   mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.158.d19 
तमसस्तस्य नाशार्थं नोपायमधिजग्मिवान्।
तपश्चचार विपुलं लोककर्ता पितामह:॥
 
 
अनुवाद
जब ब्रह्मांड के रचयिता भगवान ब्रह्मा को इस अंधकार को नष्ट करने का कोई उपाय नहीं सूझा तो उन्होंने कठोर तपस्या शुरू कर दी।
 
When Lord Brahma, the creator of the universe, could not think of any way to destroy this darkness, he began performing severe penance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)