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mahabharat 13.158.d17: देवी! अब एकाग्र होकर अपने मूल को सुनो। संसार में तम के दो प्रकार बताए गए हैं - रात्रिजन्य और देहजन्य।   |   mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]  »  श्लोक d17
 
 
श्लोक  13.158.d17 
अत: परं तमोत्पत्तिं शृणु देवि समाहिता।
द्विविधं हि तमो लोके शार्वरं देहजं तथा॥
 
 
अनुवाद
देवी! अब एकाग्र होकर अपने मूल को सुनो। संसार में तम के दो प्रकार बताए गए हैं - रात्रिजन्य और देहजन्य।
 
Goddess! Now concentrate and listen to your origin. There are two types of Tama mentioned in the world – night born and body born.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)