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mahabharat 13.158.d13: इस प्रकार आत्मा इन चार प्रकार की जातियों का आश्रय लेकर जीवित रहती है।   |   mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.158.d13 
एवं चतुर्विधां जातिमात्मा संसृत्य तिष्ठति॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार आत्मा इन चार प्रकार की जातियों का आश्रय लेकर जीवित रहती है।
 
In this way the soul lives by taking shelter of these four types of castes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)