Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.158.d12: जिन जीवों के पंख होते हैं और केवल कान के स्थान पर छेद होता है, ऐसे जीवों को अंडा माना जाता है। पशु, जंगली जानवर (बाघ, तेंदुआ आदि शिकारी जानवर) और मनुष्य - इन्हें भ्रूण मानते हैं। | mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिन जीवों के पंख होते हैं और केवल कान के स्थान पर छेद होता है, ऐसे जीवों को अंडा माना जाता है। पशु, जंगली जानवर (बाघ, तेंदुआ आदि शिकारी जानवर) और मनुष्य - इन्हें भ्रूण मानते हैं।
Those creatures which have wings and have only a hole in the place of the ear, such creatures are considered to be eggs. Animals, wild animals (predatory animals like tigers, leopards etc.) and humans – consider them as fetuses.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥