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mahabharat 13.158.d11: इनमें वृक्ष, लता, लता और घास को उद्भिज्ज कहते हैं। जूँ और मक्खियों जैसे कीटों को स्वेदज कहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]  »  श्लोक d11
 
 
श्लोक  13.158.d11 
तेषामुद्भिदजा वृक्षा लतावल्‍ल्‍यश्च वीरुध:।
दंशयूकादयश्चान्ये स्वेदजा: कृमिजातय:॥
 
 
अनुवाद
इनमें वृक्ष, लता, लता और घास को उद्भिज्ज कहते हैं। जूँ और मक्खियों जैसे कीटों को स्वेदज कहते हैं।
 
Of these, trees, creepers, vines and grasses are called Udbhijja. Insects like lice and flies are called Swedaj.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)