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mahabharat 13.158.d1: उमा ने पूछा - प्रभु! देवदेवेश्वर! यह निश्चित है कि जीव को उसके कर्मों के अनुसार अच्छे और बुरे फल मिलते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 158: प्राणियोंके चार भेदोंका निरूपण, पूर्वजन्मकी स्मृतिका रहस्य, मरकर फिर लौटनेमें कारण स्वप्नदर्शन, दैव और पुरुषार्थ तथा पुनर्जन्मका विवेचन]  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  13.158.d1 
उमोवाच
भगवन् देवदेवेश कर्मणैव शुभाशुभम्।
यथायोगं फलं जन्तु: प्राप्नोतीति विनिश्चय:॥
 
 
अनुवाद
उमा ने पूछा - प्रभु! देवदेवेश्वर! यह निश्चित है कि जीव को उसके कर्मों के अनुसार अच्छे और बुरे फल मिलते हैं।
 
Uman asked – Lord! Devdeveshwar! It is decided that a living being gets the good and bad results as per his deeds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)