Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.157.d90-d91: सत्व, रज और तम - ये तीन देहधारी जीव के गुण हैं। इनमें सत्व को सदैव प्रकाशस्वरूप माना गया है। रजोगुण को दुःख और तमोगुण को आसक्ति बताया गया है। इस संसार में इन्हीं तीन गुणों से युक्त कर्म की प्रवृत्ति होती है। | mahabharat अध्याय 13.157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सत्व, रज और तम - ये तीन देहधारी जीव के गुण हैं। इनमें सत्व को सदैव प्रकाशस्वरूप माना गया है। रजोगुण को दुःख और तमोगुण को आसक्ति बताया गया है। इस संसार में इन्हीं तीन गुणों से युक्त कर्म की प्रवृत्ति होती है।
Sattva, Raja and Tama – these three are the qualities of the bodily being. Among these, Sattva has always been considered to be the form of light. Rajogun has been described as sorrow and Tamoguna as attachment. In this world, there is a tendency towards action consisting of these three qualities.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥