Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.157.d88: श्री महेश्वर बोले - भामिनी! कर्ता कौन है? सुनो। आत्मा कर्म नहीं करता। कर्म तो सदैव प्रकृति के गुणों से युक्त जीव ही करता है।   |   mahabharat अध्याय 13.157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन]  »  श्लोक d88
 
 
श्लोक  13.157.d88 
श्रीमहेश्वर उवाच
शृणु भामिनि कर्तारमात्मा हि न च कर्मकृत् ।
प्रकृत्या गुणयुक्तेन क्रियते कर्म नित्यश:॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले - भामिनी! कर्ता कौन है? सुनो। आत्मा कर्म नहीं करता। कर्म तो सदैव प्रकृति के गुणों से युक्त जीव ही करता है।
 
Shri Maheshwar said – Bhamini! Who is the doer? Listen to this. The soul does not work. Work is always done only by a being having the qualities of nature.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)