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श्रीमहेश्वर उवाच
शृणु भामिनि कर्तारमात्मा हि न च कर्मकृत् ।
प्रकृत्या गुणयुक्तेन क्रियते कर्म नित्यश:॥
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले - भामिनी! कर्ता कौन है? सुनो। आत्मा कर्म नहीं करता। कर्म तो सदैव प्रकृति के गुणों से युक्त जीव ही करता है।
Shri Maheshwar said – Bhamini! Who is the doer? Listen to this. The soul does not work. Work is always done only by a being having the qualities of nature.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥