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श्लोक 13.157.d87  |
उमोवाच
भगवन् सर्वलोकेश कर्मात्मा न करोति चेत् ।
कोऽन्य: कर्मकरो देहे तन्मे त्वं वक्तुमर्हसि॥ |
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| अनुवाद |
| उमा ने पूछा - प्रभु! सर्वलोकेश्वर! यदि आत्मा कर्म नहीं करती, तो शरीर में और कौन कर्म करेगा? यह मुझे बताइए। |
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| Uman asked – Lord! Sarvlokeshwar! If the soul does not do the work then who else is going to do the work in the body? Tell me this. |
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