श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन]  »  श्लोक d87
 
 
श्लोक  13.157.d87 
उमोवाच
भगवन् सर्वलोकेश कर्मात्मा न करोति चेत् ।
कोऽन्य: कर्मकरो देहे तन्मे त्वं वक्तुमर्हसि॥
 
 
अनुवाद
उमा ने पूछा - प्रभु! सर्वलोकेश्वर! यदि आत्मा कर्म नहीं करती, तो शरीर में और कौन कर्म करेगा? यह मुझे बताइए।
 
Uman asked – Lord! Sarvlokeshwar! If the soul does not do the work then who else is going to do the work in the body? Tell me this.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas