Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.157.d85-d86: श्री महेश्वर ने कहा- आत्मा सदैव अपरिवर्तित रहती है! वह न स्त्री है, न पुरुष। वह अपने कर्मों के अनुसार विभिन्न जातियों में जन्म लेती है। पुरुषोचित कर्म करके स्त्री भी पुरुष बन सकती है और स्त्री भाव वाला पुरुष भी तद्नुरूप कर्म करके स्त्री बन सकता है। | mahabharat अध्याय 13.157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीमहेश्वर उवाच
निर्विकार: सदैवात्मा स्त्रीत्वं पुंस्त्वं न चात्मनि।
कर्मप्रकारेण तथा जात्यां जात्यां प्रजायते॥
कृत्वा तु पौरुषं कर्म स्त्री पुमानपि जायते।
स्त्रीभावयुक् पुमान् कृत्वा कर्मणा प्रमदा भवेत् ॥
अनुवाद
श्री महेश्वर ने कहा- आत्मा सदैव अपरिवर्तित रहती है! वह न स्त्री है, न पुरुष। वह अपने कर्मों के अनुसार विभिन्न जातियों में जन्म लेती है। पुरुषोचित कर्म करके स्त्री भी पुरुष बन सकती है और स्त्री भाव वाला पुरुष भी तद्नुरूप कर्म करके स्त्री बन सकता है।
Shri Maheshwar said- The soul is always without any change! It is neither a woman nor a man. It takes birth in different castes according to its deeds. By performing manly deeds, a woman can also become a man and a man with womanly feelings can become a woman by performing the corresponding deeds.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥