| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन] » श्लोक d73-d74 |
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| | | | श्लोक 13.157.d73-d74  | अहिंसा सत्यवचनमक्रोध: क्षान्तिरार्जवम्।
गुरूणां नित्यशुश्रूषा वृद्धानामपि पूजनम्॥
शौचादकार्यसंत्याग: सदा पथ्यस्य भोजनम्।
एवमादिगुणं वृत्तं नराणां दीर्घजीविनाम्॥ | | | | | | अनुवाद | | अहिंसा, सत्य बोलना, क्रोध का त्याग, क्षमा, सरलता, गुरुजनों की नित्य सेवा, बड़ों की पूजा, पवित्रता को ध्यान में रखते हुए अधर्म कर्मों का त्याग, सदैव सात्विक भोजन करना आदि दीर्घायु व्यक्तियों के गुण हैं। | | | | Non-violence, truthful speaking, renunciation of anger, forgiveness, simplicity, daily service to teachers, worship of elders, renunciation of unworthy deeds keeping purity in mind, always eating healthy food etc. are the qualities of long-lived people. | | ✨ ai-generated | | |
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