श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन]  »  श्लोक d72
 
 
श्लोक  13.157.d72 
श्रीमहेश्वर उवाच
शृणु तत् सर्वमखिलं गुह्यं पथ्यतरं नृणाम्।
येन वृत्तेन सम्पन्ना भवन्ति चिरजीविन:॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले - देवि! यह सब गूढ़ रहस्य मनुष्यों के लिए अत्यंत कल्याणकारी है। जिन आचरणों से युक्त होकर धनवान मनुष्य चिरकाल तक जीवित रहते हैं, उन सब को सुनो।
 
Shri Maheshwar said – Goddess! All this deep mystery is extremely beneficial for humans. Listen to all the behavior by which people who are rich in life live forever.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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