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mahabharat 13.157.d7-d8: उन्होंने पूछा - हे प्रभु! हे देवों के देव! मनुष्यों में कुछ ऐसे भी होते हैं जो दास भाव से देखे जाते हैं, जो सब प्रकार के कार्यों में तत्पर रहते हैं। उन्हें मारा-पीटा जाता है, डाँटा जाता है और हर प्रकार से परेशान किया जाता है। ऐसा किस कर्मफल के कारण होता है? कृपया मुझे यह बताइए।   |   mahabharat अध्याय 13.157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.157.d7-d8 
उमोवाच
भगवन् देवदेवेश मानुषेष्वेव केचन।
दासभूता: प्रदृश्यन्ते सर्वकर्मपरा भृशम्॥
आघातभर्त्सनसहा: पीड्यमानाश्च सर्वश:।
केन कर्मविपाकेन तन्मे शंसितुमर्हसि॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने पूछा - हे प्रभु! हे देवों के देव! मनुष्यों में कुछ ऐसे भी होते हैं जो दास भाव से देखे जाते हैं, जो सब प्रकार के कार्यों में तत्पर रहते हैं। उन्हें मारा-पीटा जाता है, डाँटा जाता है और हर प्रकार से परेशान किया जाता है। ऐसा किस कर्मफल के कारण होता है? कृपया मुझे यह बताइए।
 
He asked - O Lord! O Lord of gods! Amongst human beings, there are some who are seen to have the attitude of a slave, who remain completely engaged in all kinds of activities. They are beaten, scolded and harassed in every way. Due to which karmic result does this happen? Please tell me this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)