Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.157.d65: वह आत्मा फिर किसी अन्य शरीर में प्रवेश करती है और कहीं और जन्म लेती है। इस प्रकार, संसार अनादि काल से इसी प्रकार गतिमान है।   |   mahabharat अध्याय 13.157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन]  »  श्लोक d65
 
 
श्लोक  13.157.d65 
स पुनर्जायतेऽन्यत्र शरीरं नवमाविशन्।
एवं लोकगतिर्नित्यमादिप्रभृति वर्तते॥
 
 
अनुवाद
वह आत्मा फिर किसी अन्य शरीर में प्रवेश करती है और कहीं और जन्म लेती है। इस प्रकार, संसार अनादि काल से इसी प्रकार गतिमान है।
 
That soul then enters another body and takes birth elsewhere. In this manner, the world has been moving in this manner since the beginning of time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)