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श्लोक 13.157.d57  |
नरके स्वर्गलोके च न तथा संस्थिति: प्रिये।
नित्यं दु:खं हि नरके स्वर्गे नित्यं सुखं तथा॥ |
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| अनुवाद |
| प्रिय! लेकिन नर्क और स्वर्ग में ऐसा नहीं है। नर्क में हमेशा दुःख ही दुःख होता है और स्वर्ग में सुख ही सुख। |
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| Dear! But this is not the case in hell and heaven. There is always only sorrow in hell and only happiness in heaven. |
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