Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.157.d53-d54: श्री महेश्वर बोले - देवी! तुम्हारी शंका उचित है, अब मैं तुम्हें सत्य उत्तर देता हूँ। कुछ लोग कहते हैं कि अशुभ कर्मों का फल पहले मिलता है, कुछ कहते हैं कि शुभ कर्मों का फल पहले मिलता है। परन्तु ये दोनों बातें मिथ्या हैं। सत्य क्या है? यह मैं तुम्हें बता रहा हूँ।   |   mahabharat अध्याय 13.157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन]  »  श्लोक d53-d54
 
 
श्लोक  13.157.d53-d54 
श्रीमहेश्वर उवाच
स्थाने संशयितं देवि तत् ते वक्ष्यामि तत्त्वत:॥
अशुभं पूर्वमित्याहुरपरे शुभमित्यपि।
मिथ्या तदुभयं प्रोक्तं केवलं तद् ब्रवीमि ते॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले - देवी! तुम्हारी शंका उचित है, अब मैं तुम्हें सत्य उत्तर देता हूँ। कुछ लोग कहते हैं कि अशुभ कर्मों का फल पहले मिलता है, कुछ कहते हैं कि शुभ कर्मों का फल पहले मिलता है। परन्तु ये दोनों बातें मिथ्या हैं। सत्य क्या है? यह मैं तुम्हें बता रहा हूँ।
 
Shri Maheshwar said - Devi! Your doubt is justified, now I will give you the true answer. Some people say that the results of inauspicious deeds are received first, others say that the results of auspicious deeds are received first. But both these things are false. What is the truth? I am telling you this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)