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mahabharat 13.157.d52: उन्होंने पूछा - हे प्रभु! जब कोई जीवात्मा अनेक अच्छे-बुरे कर्म करके पुनः जन्म लेती है, तो उसे पहले कौन-सा फल मिलता है - अच्छा या बुरा? हे प्रभु! यही मेरा संशय है। कृपया इसका समाधान करें।   |   mahabharat अध्याय 13.157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.157.d52 
उमोवाच
भगवन् विविधं कर्म कृत्वा जन्तु: शुभाशुभम्।
किं तयो: पूर्वकतरं भुङ्‍‍क्ते जन्मान्तरे पुन:॥
एष मे संशयो देव तं मे त्वं छेत्तुमर्हसि।
 
 
अनुवाद
उन्होंने पूछा - हे प्रभु! जब कोई जीवात्मा अनेक अच्छे-बुरे कर्म करके पुनः जन्म लेती है, तो उसे पहले कौन-सा फल मिलता है - अच्छा या बुरा? हे प्रभु! यही मेरा संशय है। कृपया इसका समाधान करें।
 
He asked - O Lord! When a soul performs various good and bad deeds and takes birth again, which of the two does it reap first, the good or the bad? O Lord! This is my doubt. Please clear it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)