श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन]  »  श्लोक d47-d48
 
 
श्लोक  13.157.d47-d48 
श्रीमहेश्वर उवाच
स्थाने संशयितं देवि शृणु तत्त्वविनिश्चयम्॥
नक्षत्राणि ग्रहाश्चैव शुभाशुभनिवेदका:।
मानवानां महाभागे न तु कर्मकरा: स्वयम्॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले- देवी! आपने उचित ही शंका की है। इस विषय में मूल मत सुनिए। हे महामते! ग्रह-नक्षत्र केवल मनुष्यों के शुभ-अशुभ कर्मों की सूचना देते हैं। वे स्वयं कुछ नहीं करते।
 
Shri Maheshwar said- Devi! You have raised a valid doubt. Listen to the principle opinion on this matter. O great one! The planets and stars only give information about the good and bad things for humans. They themselves do not do anything.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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