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mahabharat 13.157.d42-d44: ये बातें कर्मफल के विषय में संक्षेप में कही गई हैं। कर्मों के संचय के विषय में जो कुछ मैंने अब तक तुम्हें नहीं बताया, उसे भी तुम अपनी बुद्धि से तर्क करके जान लो। तुम सुनना चाहते थे, इसलिए मैंने ये सब बातें तुम्हें बता दीं। अब तुम और क्या सुनना चाहते हो?   |   mahabharat अध्याय 13.157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन]  »  श्लोक d42-d44
 
 
श्लोक  13.157.d42-d44 
एतदुद्देशत: प्रोक्तं कर्मपाकफलं प्रति॥
यदन्यच्च मया नोक्तं यस्मिंस्ते कर्मसंग्रहे।
बुद्धितर्केण तत् सर्वं तथा वेदितुमर्हसि॥
कथितं श्रोतुकामाया भूय: श्रोतुं किमिच्छसि॥
 
 
अनुवाद
ये बातें कर्मफल के विषय में संक्षेप में कही गई हैं। कर्मों के संचय के विषय में जो कुछ मैंने अब तक तुम्हें नहीं बताया, उसे भी तुम अपनी बुद्धि से तर्क करके जान लो। तुम सुनना चाहते थे, इसलिए मैंने ये सब बातें तुम्हें बता दीं। अब तुम और क्या सुनना चाहते हो?
 
These things have been told briefly about the results of karmas. Whatever I have not told you about the accumulation of karmas till now, you should also know it by reasoning with your intellect. You wanted to listen, so I told you all these things. What else do you want to hear now?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)