Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.157.d38-d39: श्री महेश्वर बोले - देवी! जो क्रूर मनुष्य किसी कारणवश या अकारण ही दूसरे प्राणियों के प्राण लेते हैं, वे अपने कर्मों का फल उसी प्रकार पाते हैं। जो विष देते हैं, वे विष से मरते हैं और जो शस्त्रों से दूसरों को मारते हैं, वे स्वयं अगले जन्म में शस्त्रों के प्रहार से मारे जाते हैं। | mahabharat अध्याय 13.157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीमहेश्वर उवाच
ये पुरा मनुजा देवि कारणाकारणादपि।
यथासुभिर्वियुज्यन्ते प्राणिन: प्राणिनिर्दया:॥
तथैव ते प्राप्नुवन्ति यथैवात्मकृतं फलम्।
विषदास्तु विषेणैव शस्त्रै: शस्त्रेण घातका:॥
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले - देवी! जो क्रूर मनुष्य किसी कारणवश या अकारण ही दूसरे प्राणियों के प्राण लेते हैं, वे अपने कर्मों का फल उसी प्रकार पाते हैं। जो विष देते हैं, वे विष से मरते हैं और जो शस्त्रों से दूसरों को मारते हैं, वे स्वयं अगले जन्म में शस्त्रों के प्रहार से मारे जाते हैं।
Shri Maheshwar said - Devi! Those cruel people who take the life of other creatures for some reason or without any reason, they get the result of their actions in the same way. Those who give poison die by poison and those who kill others with weapons, they themselves are killed by the blows of weapons in their next birth.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥