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mahabharat 13.157.d35: प्रिये! इस प्रकार तुम्हारा पापकर्मों के विषय में संशय दूर हो जाएगा। देवि! मैंने तुम्हें यह विषय बता दिया है। अब तुम और क्या सुनना चाहती हो?   |   mahabharat अध्याय 13.157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.157.d35 
विद्‍ध्येवं पापके कार्ये निर्विशंका भव प्रिये।
इति ते कथितं देवि भूय: श्रोतुं किमिच्छसि॥
 
 
अनुवाद
प्रिये! इस प्रकार तुम्हारा पापकर्मों के विषय में संशय दूर हो जाएगा। देवि! मैंने तुम्हें यह विषय बता दिया है। अब तुम और क्या सुनना चाहती हो?
 
Dear! In this way your doubts about sinful deeds should be dispelled. Devi! I have told you about this topic. What else do you want to hear?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)