Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.157.d31: हर व्यक्ति दो प्रकार के पाप करता है, चाहे वह सज्जन हो या दुष्ट। एक वह पाप जो जानबूझकर किसी उद्देश्य से किया जाता है और दूसरा वह पाप जो ईश्वर की इच्छा से, अनजाने में, अचानक हो जाता है। | mahabharat अध्याय 13.157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्विधा तु क्रियते पापं सद्भिश्चासद्भिरेव च।
अभिसंधाय वा नित्यमन्यथा वा यदृच्छया॥
अनुवाद
हर व्यक्ति दो प्रकार के पाप करता है, चाहे वह सज्जन हो या दुष्ट। एक वह पाप जो जानबूझकर किसी उद्देश्य से किया जाता है और दूसरा वह पाप जो ईश्वर की इच्छा से, अनजाने में, अचानक हो जाता है।
Two kinds of sins are committed by everyone, be it a gentleman or a bad man. One is the sin which is committed knowingly with some purpose in mind and the other is the sin which is committed suddenly by the will of God, without knowing it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥