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mahabharat 13.157.d29: कहा जाता है कि अश्वमेध यज्ञ सभी पापों का नाश कर देता है। लोग अपने पापों का नाश करने के लिए तरह-तरह की तपस्याएँ भी करते हैं (यहाँ आप कहते हैं कि तीनों लोकों में कोई भी ऐसा नहीं है जो कर्मफल का नाश कर सके), इसलिए मुझे इस विषय में संदेह है। कृपया मेरे इस संदेह को दूर करें।   |   mahabharat अध्याय 13.157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.157.d29 
सर्वपापहरं चेति हयमेधं वदन्ति च।
प्रायश्चित्तानि चान्यानि पापनाशाय कुर्वते॥
तस्मान्मया संशयितं त्वं तच्छेत्तुमिहार्हसि।
 
 
अनुवाद
कहा जाता है कि अश्वमेध यज्ञ सभी पापों का नाश कर देता है। लोग अपने पापों का नाश करने के लिए तरह-तरह की तपस्याएँ भी करते हैं (यहाँ आप कहते हैं कि तीनों लोकों में कोई भी ऐसा नहीं है जो कर्मफल का नाश कर सके), इसलिए मुझे इस विषय में संदेह है। कृपया मेरे इस संदेह को दूर करें।
 
It is said that Ashwamedha Yagya destroys all sins. People perform various penances also to destroy their sins (here you say that there is no one in the three worlds who can destroy the results of karma) hence I have a doubt in this matter. Please remove this doubt of mine.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)