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mahabharat 13.157.d27: तीनों लोकों में ऐसा कोई मनुष्य नहीं है जो बिना भोगे कर्मों के फल को नष्ट कर सके। हे प्रिये! मैंने तुम्हें यह सब बता दिया है। अब तुम संशय से मुक्त हो जाओ।   |   mahabharat अध्याय 13.157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.157.d27 
नास्ति कर्मफलच्छेत्ता कश्चिल्लोकत्रयेऽपि च।
इति ते कथितं सर्वं निर्विशङ्का भव प्रिये॥
 
 
अनुवाद
तीनों लोकों में ऐसा कोई मनुष्य नहीं है जो बिना भोगे कर्मों के फल को नष्ट कर सके। हे प्रिये! मैंने तुम्हें यह सब बता दिया है। अब तुम संशय से मुक्त हो जाओ।
 
There is no person in the three worlds who can destroy the fruits of actions without experiencing them. Dear! I have told you everything about this. Now be free from doubts.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)