Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.157.d25: इस धरती पर यदि वास्तविक अपराधी दण्डित नहीं होते या दूसरों द्वारा झूठे दण्डित किये जाते हैं तो यमराज उन वास्तविक अपराधियों को अवश्य दण्ड देते हैं, क्योंकि वे भली-भांति जानते हैं कि किसने अपराध किया है और किसने नहीं। | mahabharat अध्याय 13.157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अदण्डिता वा ये तथ्या मिथ्या वा दण्डिता भुवि।
तान् यमो दण्डयत्येव स हि वेद कृताकृतम्॥
अनुवाद
इस धरती पर यदि वास्तविक अपराधी दण्डित नहीं होते या दूसरों द्वारा झूठे दण्डित किये जाते हैं तो यमराज उन वास्तविक अपराधियों को अवश्य दण्ड देते हैं, क्योंकि वे भली-भांति जानते हैं कि किसने अपराध किया है और किसने नहीं।
On this earth, if the real criminals remain unpunished or are falsely punished by others, then Yamraj surely punishes those real criminals because he knows very well who has committed the crime and who has not.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥