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mahabharat 13.157.d104: प्राचीन काल से ही इस संसार में आत्मा का यही भाग्य रहा है। देवी! ये सब बातें आपको बताई जा चुकी हैं। अब आप और क्या सुनना चाहती हैं?   |   mahabharat अध्याय 13.157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.157.d104 
आदिप्रभृति लोकेऽस्मिन्नेवमात्मगति: स्मृता।
एतत् ते कथितं देवि किं भूय: श्रोतुमिच्छसि॥
 
 
अनुवाद
प्राचीन काल से ही इस संसार में आत्मा का यही भाग्य रहा है। देवी! ये सब बातें आपको बताई जा चुकी हैं। अब आप और क्या सुनना चाहती हैं?
 
Since ancient times, such is the fate of the soul in this world. Devi! All these topics have been told to you. What else do you want to hear?
 
(दाक्षिणात्य प्रतिमें अध्याय समाप्त)


 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)