Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.157.d101-d102: जब जन्म लेने वाले प्राणियों के कर्म क्षीण हो जाते हैं, तो किसी भी कारण से इस शरीर में कष्ट होने लगते हैं। जब शरीर क्षीण हो जाता है, तो देहाभिमानी प्राणी कर्म के अधीन होकर उस शरीर को छोड़कर चला जाता है। | mahabharat अध्याय 13.157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब जन्म लेने वाले प्राणियों के कर्म क्षीण हो जाते हैं, तो किसी भी कारण से इस शरीर में कष्ट होने लगते हैं। जब शरीर क्षीण हो जाता है, तो देहाभिमानी प्राणी कर्म के अधीन होकर उस शरीर को छोड़कर चला जाता है।
When the karmas of the beings born get exhausted, troubles start happening in this body due to any reason. When the body gets exhausted due to that, the body conscious being becomes subject to karma and leaves that body and goes away.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥