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श्लोक 13.157.d100  |
श्रीमहेश्वर उवाच
तदहं ते प्रवक्ष्यामि शृणु कल्याणि कारणम्।
एतन्नैर्मापिकैश्चापि मुह्यन्ते सूक्ष्मबुद्धिभि:॥ |
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| अनुवाद |
| श्री महेश्वर बोले- कल्याणी! मैं तुम्हें इसका कारण बताता हूँ, सुनो। इस विषय में कुशाग्र बुद्धि वाले विद्वान भी भ्रमित हो जाते हैं। |
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| Shri Maheshwar said- Kalyani! I will tell you the reason for this, listen. Even scholars with keen intellects get confused in this matter. |
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