श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 157: उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन]  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  13.157.d1 
उमोवाच
भगवन् देवदेवेश प्रमदा विधवा भृशम्।
दृश्यन्ते मानुषे लोके सर्वकल्याणवर्जिता:॥
केन कर्मविपाकेन तन्मे शंसितुमर्हसि।
 
 
अनुवाद
उमा ने पूछा - हे प्रभु! देवदेवेश्वर! मनुष्य लोक में अनेक युवतियाँ कल्याण से रहित होकर विधवा प्रतीत होती हैं। ऐसा किस कर्म के कारण होता है? यह मुझे बताइए।
 
Uman asked – Lord! Devdeveshwar! In the human world, many young women appear to be widows devoid of all welfare. Due to which action does this happen? Tell me this.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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