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mahabharat 13.156.d95: देवी! जिस प्रकार पुरुषों को अपने कर्मों का फल मिलता है, उसी प्रकार स्त्रियों को भी अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है। यह बात तो मैंने तुम्हें बता दी। अब तुम और क्या सुनना चाहती हो?   |   mahabharat अध्याय 13.156: अन्धत्व और पंगुत्व आदि नाना प्रकारके दोषों और रोगोंके कारणभूत दुष्कर्मोंका वर्णन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.156.d95 
स्त्रीणामपि तथा देवि यथा पुंसां तु कर्मजम्।
इति ते कथितं देवि भूय: श्रोतुं किमिच्छसि॥
 
 
अनुवाद
देवी! जिस प्रकार पुरुषों को अपने कर्मों का फल मिलता है, उसी प्रकार स्त्रियों को भी अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है। यह बात तो मैंने तुम्हें बता दी। अब तुम और क्या सुनना चाहती हो?
 
Devi! Just as men get the fruits of their actions, similarly women also have to suffer the consequences of their actions. I have told you about this matter. What else do you want to hear now?
 
(दाक्षिणात्य प्रतिमें अध्याय समाप्त)


 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)