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mahabharat 13.156.d91-d94: श्री महेश्वर बोले - कल्याणी! मैं तुम्हें कारण बताता हूँ, सुनो! जो लोग भयंकर कर्मों में लगे रहते हैं और पशुओं का पुरुषत्व नष्ट करते हैं, अर्थात् पशुओं का बधियाकरण करते हैं, वे अपनी जीविका चलाते हैं और उसी में सुख पाते हैं, हे प्रिये! ऐसे आचरण वाले मनुष्य मृत्यु के बाद यम के दण्ड से दण्डित होकर दीर्घकाल तक नरक में वास करते हैं। यदि वे मनुष्य योनि में जन्म लेते हैं, तो कायर, नपुंसक और नपुंसक हो जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.156: अन्धत्व और पंगुत्व आदि नाना प्रकारके दोषों और रोगोंके कारणभूत दुष्कर्मोंका वर्णन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.156.d91-d94 
श्रीमहेश्वर उवाच
तदहं ते प्रवक्ष्यामि शृणु कल्याणि कारणम्।
ये पुरा मनुजा भूत्वा घोरकर्मरतास्तथा।
पशुपुंस्त्वोपघातेन जीवन्ति च रमन्ति च॥
एवंयुक्तसमाचारा: कालधर्मं गतास्तु ते॥
दण्डिता यमदण्डेन निरयस्थाश्चिरं प्रिये॥
यदि चेन्मानुषं जन्म लभेरंस्ते तथाविधा:।
क्लीबा वर्षवराश्चैव षण्ढकाश्च भवन्ति ते॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले - कल्याणी! मैं तुम्हें कारण बताता हूँ, सुनो! जो लोग भयंकर कर्मों में लगे रहते हैं और पशुओं का पुरुषत्व नष्ट करते हैं, अर्थात् पशुओं का बधियाकरण करते हैं, वे अपनी जीविका चलाते हैं और उसी में सुख पाते हैं, हे प्रिये! ऐसे आचरण वाले मनुष्य मृत्यु के बाद यम के दण्ड से दण्डित होकर दीर्घकाल तक नरक में वास करते हैं। यदि वे मनुष्य योनि में जन्म लेते हैं, तो कायर, नपुंसक और नपुंसक हो जाते हैं।
 
Shri Maheshwar said - Kalyani! I am telling you the reason, listen! Those people who are engaged in horrible deeds and destroy the masculinity of animals, i.e., castrate animals, earn their livelihood and find happiness in that, dear! People with such conduct, after death, are punished by the punishment of Yama and live in hell for a long time. If they are born as humans, they become cowards, impotent and eunuchs.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)