Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.156.d89-d90: उन्होंने पूछा- हे देव! हे देवों के देव महादेव की आँखें नष्ट करने वाले! मनुष्यों में कुछ लोग कायर, नपुंसक और नपुंसक होते हैं, जो स्वयं इस पृथ्वी पर नीच हैं, नीच कर्म करने में तत्पर रहते हैं और नीचों का साथ देते हैं। उनकी नपुंसकता का क्या कारण है? कृपया मुझे यह बताइए। | mahabharat अध्याय 13.156: अन्धत्व और पंगुत्व आदि नाना प्रकारके दोषों और रोगोंके कारणभूत दुष्कर्मोंका वर्णन] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उन्होंने पूछा- हे देव! हे देवों के देव महादेव की आँखें नष्ट करने वाले! मनुष्यों में कुछ लोग कायर, नपुंसक और नपुंसक होते हैं, जो स्वयं इस पृथ्वी पर नीच हैं, नीच कर्म करने में तत्पर रहते हैं और नीचों का साथ देते हैं। उनकी नपुंसकता का क्या कारण है? कृपया मुझे यह बताइए।
He asked- O Lord! O Mahadev who destroyed the eyes of the God of Gods! Amongst humans, some people are cowards, impotent and eunuchs, who are themselves lowly on this earth, are always ready to do lowly deeds and support the lowly. What is the reason for their impotence? Please tell me this.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥