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श्लोक  13.156.d70-d71 
उमोवाच
भगवन् मानुषा: केचिद् दृश्यन्ते मानुषेषु वै।
उन्मत्ताश्च पिशाचाश्च पर्यटन्तो यतस्तत:॥
केन कर्मविपाकेन तन्मे शंसितुमर्हसि॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने पूछा - हे प्रभु! मनुष्यों में कुछ लोग पागल और भूत-प्रेत की तरह घूमते दिखाई देते हैं। उनकी ऐसी दशा का कारण क्या है? कृपया मुझे यह बताइए।
 
He asked - O Lord! Some people among humans are seen roaming around like madmen and ghosts. What is the reason for their such condition? Please tell me this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)