Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.156.d7-d8: उन्होंने पूछा - "प्रभु! कुछ लोग मुख के रोगों से सदैव परेशान रहते हैं, दाँतों, गले और गालों के रोगों से बहुत पीड़ित रहते हैं, कुछ जन्म से ही रोगी होते हैं और कुछ जन्म के बाद उन रोगों के शिकार हो जाते हैं। ऐसा किस कर्मफल के कारण होता है? कृपया मुझे यह बताएँ।" | mahabharat अध्याय 13.156: अन्धत्व और पंगुत्व आदि नाना प्रकारके दोषों और रोगोंके कारणभूत दुष्कर्मोंका वर्णन] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उन्होंने पूछा - "प्रभु! कुछ लोग मुख के रोगों से सदैव परेशान रहते हैं, दाँतों, गले और गालों के रोगों से बहुत पीड़ित रहते हैं, कुछ जन्म से ही रोगी होते हैं और कुछ जन्म के बाद उन रोगों के शिकार हो जाते हैं। ऐसा किस कर्मफल के कारण होता है? कृपया मुझे यह बताएँ।"
He asked - Lord! Some people are always troubled with diseases of the mouth, they suffer a lot from diseases of teeth, throat and cheeks, some are sick from birth and some become victims of those diseases after birth. Due to which karmic consequence does this happen? Please tell me this.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥