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mahabharat 13.156.d51: उन्होंने पूछा - हे प्रभु! देव! इस पृथ्वी पर बहुत बड़ी संख्या में ऐसे लोग दिखाई देते हैं जो वात, पित्त और कफ जनित रोगों से अत्यंत दुःखी हैं तथा एक ही समय में इन तीनों के संक्रमण से तथा अन्य अनेक रोगों से पीड़ित हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.156: अन्धत्व और पंगुत्व आदि नाना प्रकारके दोषों और रोगोंके कारणभूत दुष्कर्मोंका वर्णन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 156: अन्धत्व और पंगुत्व आदि नाना प्रकारके दोषों और रोगोंके कारणभूत दुष्कर्मोंका वर्णन]  »  श्लोक d51
 
 
श्लोक  13.156.d51 
उमोवाच
भगवन् मानुषा: केचिद् दृश्यन्ते बहवो भुवि।
वातजै: पित्तजै रोगैर्युगपत् संनिपातकै:॥
रोगैर्बहुविधैर्देव क्लिश्यमाना: सुदु:खिता:।
 
 
अनुवाद
उन्होंने पूछा - हे प्रभु! देव! इस पृथ्वी पर बहुत बड़ी संख्या में ऐसे लोग दिखाई देते हैं जो वात, पित्त और कफ जनित रोगों से अत्यंत दुःखी हैं तथा एक ही समय में इन तीनों के संक्रमण से तथा अन्य अनेक रोगों से पीड़ित हैं।
 
He asked - O Lord! Dev! On this earth, a large number of people are seen who are very sad due to the diseases caused by Vata, Pitta and Kapha and are suffering from the infection of all three at the same time and from many other diseases.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)