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mahabharat 13.156.d45-d46: श्री महेश्वर बोले - देवी! जो मनुष्य पूर्वकाल में दूसरों की गाँठें छेदते थे, जो मुक्का मारने में निर्दयी, क्रूर, पापी, विनाशकारी और काँटा चुभोकर पीड़ा पहुँचाने वाले थे, वे अच्छे हैं! ऐसे आचरण वाले मनुष्य अगले जन्म में गठिया और फ़ीलपाँव से पीड़ित होकर अत्यंत दुःखी होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.156: अन्धत्व और पंगुत्व आदि नाना प्रकारके दोषों और रोगोंके कारणभूत दुष्कर्मोंका वर्णन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 156: अन्धत्व और पंगुत्व आदि नाना प्रकारके दोषों और रोगोंके कारणभूत दुष्कर्मोंका वर्णन]  »  श्लोक d45-d46
 
 
श्लोक  13.156.d45-d46 
श्रीमहेश्वर उवाच
ये पुरा मनुजा देवि ग्रन्थिभेदकरा नृणाम्।
मुष्टिप्रहारपरुषा नृशंसा: पापकारिण:॥
पाटकास्तोटकाश्चैव शूलतुन्दास्तथैव च।
एवंयुक्तसमाचारा: पुनर्जन्मनि शोभने।
ग्रन्थिभि: पिल्लकैश्चैव क्लिश्यन्ते भृशदु:खिता:॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले - देवी! जो मनुष्य पूर्वकाल में दूसरों की गाँठें छेदते थे, जो मुक्का मारने में निर्दयी, क्रूर, पापी, विनाशकारी और काँटा चुभोकर पीड़ा पहुँचाने वाले थे, वे अच्छे हैं! ऐसे आचरण वाले मनुष्य अगले जन्म में गठिया और फ़ीलपाँव से पीड़ित होकर अत्यंत दुःखी होते हैं।
 
Shri Maheshwar said - Devi! Those men who used to pierce the knots of others in the past, who were ruthless in punching, cruel, sinful, destructive and used to inflict pain by piercing with a thorn, are good! People with such conduct, in their next birth, suffer from arthritis and elephantiasis and are very unhappy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)