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mahabharat 13.156.d36-d38: उस जन्म में वे सैकड़ों कोढ़ रोगों से घिरे रहते हैं और पीड़ा से पीड़ित रहते हैं। किसी को चर्म रोग होता है, किसी को व्रण (कोढ़ के घाव) होते हैं, या कोई श्वेत कोढ़ से ग्रस्त दिखाई देता है। हे देवी! वे सभी लोग अपने-अपने कर्मों के अनुसार फल पाते हैं और नाना प्रकार के कोढ़ों से पीड़ित होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.156: अन्धत्व और पंगुत्व आदि नाना प्रकारके दोषों और रोगोंके कारणभूत दुष्कर्मोंका वर्णन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 156: अन्धत्व और पंगुत्व आदि नाना प्रकारके दोषों और रोगोंके कारणभूत दुष्कर्मोंका वर्णन]  »  श्लोक d36-d38
 
 
श्लोक  13.156.d36-d38 
अत्र ते क्लेशसंयुक्ता: कुष्ठरोगशतैर्वृता:॥
केचित् त्वग्दोषसंयुक्ता व्रणकुष्ठैश्च संयुता:।
श्वित्रकुष्ठयुता वापि बहुधा कुष्ठसंयुता:॥
भवन्त्येव नरा देवि यथा येन कृतं फलम्॥
 
 
अनुवाद
उस जन्म में वे सैकड़ों कोढ़ रोगों से घिरे रहते हैं और पीड़ा से पीड़ित रहते हैं। किसी को चर्म रोग होता है, किसी को व्रण (कोढ़ के घाव) होते हैं, या कोई श्वेत कोढ़ से ग्रस्त दिखाई देता है। हे देवी! वे सभी लोग अपने-अपने कर्मों के अनुसार फल पाते हैं और नाना प्रकार के कोढ़ों से पीड़ित होते हैं।
 
In that birth they are surrounded by hundreds of diseases of leprosy and suffer from pain. Some have skin diseases, some suffer from ulcers (wounds of leprosy) or some are seen tainted with white leprosy. Goddess! All those people get the result according to their deeds and become victims of various types of leprosy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)