vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 156: अन्धत्व और पंगुत्व आदि नाना प्रकारके दोषों और रोगोंके कारणभूत दुष्कर्मोंका वर्णन]
»
श्लोक d20
श्लोक
13.156.d20
तैस्तैर्बहुविधाकारैर्व्याधिभिर्दु:खसंश्रिता:।
भवन्त्येव तथा देवि यथा चैव कृतं पुरा॥
अनुवाद
हे देवी! वे नाना प्रकार के रोगों से ग्रस्त होकर दुःख में डूब जाते हैं। वे अपने पूर्वजन्मों के कर्मों का फल भोगते हैं।
Devi! Afflicted with diseases of various kinds, they become immersed in misery. They suffer the consequences of their deeds in their previous lives.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×