Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.156.d20: हे देवी! वे नाना प्रकार के रोगों से ग्रस्त होकर दुःख में डूब जाते हैं। वे अपने पूर्वजन्मों के कर्मों का फल भोगते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.156: अन्धत्व और पंगुत्व आदि नाना प्रकारके दोषों और रोगोंके कारणभूत दुष्कर्मोंका वर्णन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 156: अन्धत्व और पंगुत्व आदि नाना प्रकारके दोषों और रोगोंके कारणभूत दुष्कर्मोंका वर्णन]  »  श्लोक d20
 
 
श्लोक  13.156.d20 
तैस्तैर्बहुविधाकारैर्व्याधिभिर्दु:खसंश्रिता:।
भवन्त्येव तथा देवि यथा चैव कृतं पुरा॥
 
 
अनुवाद
हे देवी! वे नाना प्रकार के रोगों से ग्रस्त होकर दुःख में डूब जाते हैं। वे अपने पूर्वजन्मों के कर्मों का फल भोगते हैं।
 
Devi! Afflicted with diseases of various kinds, they become immersed in misery. They suffer the consequences of their deeds in their previous lives.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)