vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 156: अन्धत्व और पंगुत्व आदि नाना प्रकारके दोषों और रोगोंके कारणभूत दुष्कर्मोंका वर्णन]
»
श्लोक d15
श्लोक
13.156.d15
उमोवाच
पीड्यन्ते सततं देव मानुषेष्वेव केचन।
कुक्षिपक्षाश्रितैर्दोषैर्व्याधिभिश्चोदराश्रितै:॥
अनुवाद
उमा ने पूछा - भगवन्! मनुष्यों में कुछ लोग सदैव भूख, पेट के रोग तथा पेट के दोषों से पीड़ित रहते हैं।
Uman asked – God! Some people among humans always suffer from hunger and side related defects and stomach related diseases.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×