Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.155.d62-d66: श्री महेश्वर बोले, "देवी! मैं तुमसे यह कह रहा हूँ, तुम एकाग्र होकर सब बातें सुनो। जो पुरुष पहले अपनी पत्नी की उपेक्षा करके स्वेच्छाचारी हो जाते हैं, लज्जा और भय का त्याग कर देते हैं, मन, वाणी, शरीर और कर्म से दूसरों की निन्दा करते हैं, अन्न और आश्रय से रहित रहते हैं तथा अपनी पत्नियों के हृदय में क्रोध उत्पन्न करते हैं; ऐसे भ्रष्ट आचरण वाले पुरुष पुनर्जन्म में स्त्रियों के लिए दुर्भाग्यशाली और अप्रिय होते हैं। ऐसे अभागे पुरुषों को अपनी पत्नियों से भी प्रेमजनित सुख नहीं मिलता। | mahabharat अध्याय 13.155: विविध प्रकारके कर्मफलोंका वर्णन] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीमहेश्वर उवाच
तदहं ते प्रवक्ष्यामि शृणु सर्वं समाहिता॥
ये पुरा मनुजा देवि स्वदारेष्वनपेक्षया।
यथेष्टवृत्तयश्चैव निर्लज्जा वीतसम्भ्रमा:॥
परेषां विप्रियकरा वाङ्मन:कायकर्मभि:।
निराश्रया निरन्नाद्या: स्त्रीणां हृदयकोपना:॥
एवं युक्तसमाचारा: पुनर्जन्मनि ते नरा:।
दुर्भगास्तु भवन्त्येव स्त्रीणां हृदयविप्रिया:॥
नास्ति तेषां रतिसुखं स्वदारेष्वपि किंचन॥
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले, "देवी! मैं तुमसे यह कह रहा हूँ, तुम एकाग्र होकर सब बातें सुनो। जो पुरुष पहले अपनी पत्नी की उपेक्षा करके स्वेच्छाचारी हो जाते हैं, लज्जा और भय का त्याग कर देते हैं, मन, वाणी, शरीर और कर्म से दूसरों की निन्दा करते हैं, अन्न और आश्रय से रहित रहते हैं तथा अपनी पत्नियों के हृदय में क्रोध उत्पन्न करते हैं; ऐसे भ्रष्ट आचरण वाले पुरुष पुनर्जन्म में स्त्रियों के लिए दुर्भाग्यशाली और अप्रिय होते हैं। ऐसे अभागे पुरुषों को अपनी पत्नियों से भी प्रेमजनित सुख नहीं मिलता।
Shri Maheshwar said, "Devi! I am telling you this, you listen to everything with concentration. Those men who first neglect their wives and become willful, abandon shame and fear, speak ill of others through their mind, speech, body and actions, and remain without food and shelter and create anger in the heart of their wives; such men with corrupt conduct are unfortunate and unpleasant to women in their rebirth. Such unfortunate men do not get happiness born out of love even from their wives.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥