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mahabharat 13.155.d56-d60: श्री महेश्वर बोले - देवि! जो पुरुष कोमल स्वभाव वाले और मधुर वचन बोलने वाले हैं, अपनी पत्नियों से संतुष्ट रहते हैं, यदि उनकी कई पत्नियाँ हों तो उनके साथ समान व्यवहार करते हैं, जिन स्त्रियों को वे स्वभाव से नापसंद करते हैं, उनके साथ भी उदारता का व्यवहार करते हैं, स्त्रियों के दोषों की चर्चा नहीं करते, केवल उनके गुणों का गुणगान करते हैं, समय पर अन्न-जल का दान करते हैं, अतिथियों को स्वादिष्ट भोजन कराते हैं, अपनी पत्नियों में आसक्त रहने का व्रत लेते हैं, धैर्यवान और दुःखों से रहित होते हैं, सुंदर दिखते हैं! ऐसे आचरण वाले पुरुष पुनर्जन्म में सदैव सौभाग्यशाली होते हैं। देवि! वे दरिद्र होने पर भी अपनी पत्नियों से प्रिय होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.155: विविध प्रकारके कर्मफलोंका वर्णन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 155: विविध प्रकारके कर्मफलोंका वर्णन]  »  श्लोक d56-d60
 
 
श्लोक  13.155.d56-d60 
श्रीमहेश्वर उवाच
ये पुरा मानुषा देवि सौम्यशीला: प्रियंवदा:।
स्वदारैरेव संतुष्टा दारेषु समवृत्तय:॥
दाक्षिण्येनैव वर्तन्ते प्रमदास्वप्रियास्वपि।
न तु प्रत्यादिशन्त्येव स्त्रीदोषान् गुणसंश्रितान्॥
अन्नपानीयदा: काले नृणां स्वादुप्रदाश्च ये।
स्वदारव्रतिनश्चैव धृतिमन्तो निरत्यया:॥
एवंयुक्तसमाचारा: पुनर्जन्मनि शोभने।
मानुषास्ते भवन्त्येव सततं सुभगा भृशम्॥
अर्थादृतेऽपि ते देवि भवन्ति प्रमदाप्रिया:॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले - देवि! जो पुरुष कोमल स्वभाव वाले और मधुर वचन बोलने वाले हैं, अपनी पत्नियों से संतुष्ट रहते हैं, यदि उनकी कई पत्नियाँ हों तो उनके साथ समान व्यवहार करते हैं, जिन स्त्रियों को वे स्वभाव से नापसंद करते हैं, उनके साथ भी उदारता का व्यवहार करते हैं, स्त्रियों के दोषों की चर्चा नहीं करते, केवल उनके गुणों का गुणगान करते हैं, समय पर अन्न-जल का दान करते हैं, अतिथियों को स्वादिष्ट भोजन कराते हैं, अपनी पत्नियों में आसक्त रहने का व्रत लेते हैं, धैर्यवान और दुःखों से रहित होते हैं, सुंदर दिखते हैं! ऐसे आचरण वाले पुरुष पुनर्जन्म में सदैव सौभाग्यशाली होते हैं। देवि! वे दरिद्र होने पर भी अपनी पत्नियों से प्रिय होते हैं।
 
Shri Maheshwar said - Goddess! Those men who are of gentle nature and speak sweet words, are satisfied with their own wives, if they have many wives, they treat them equally, behave generously even with the women whom they dislike due to their nature, do not discuss the faults of women, but only praise their virtues, donate food and water on time, serve delicious food to guests, take the vow to remain attached to their wives, are patient and free from sorrows, look good! Men with such conduct are always fortunate in their rebirth. Goddess! They are loved by their wives even if they are poor.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)