श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 155: विविध प्रकारके कर्मफलोंका वर्णन]  »  श्लोक d17
 
 
श्लोक  13.155.d17 
उमोवाच
भगवन् देवदेवेश त्रियक्ष वृषभध्वज।
मानुषास्त्रिविधा देव दृश्यन्ते सततं विभो॥
 
 
अनुवाद
उमान ने कहा - प्रभु! देवदेवेश्वर! त्रिलोचन! वृषभध्वज! देव! विभो! मनुष्य तीन प्रकार के प्रतीत होते हैं।
 
Uman said – Lord! Devdeveshwar! Trilochan! Taurus flag! God! Vibho! Human beings appear to be of three types.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)