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mahabharat 13.155.d108: देवी! मनुष्य के अच्छे या बुरे कर्म ही उसे सुख या दुःख पहुँचाते हैं। यह मैंने तुम्हें बता दिया। अब तुम और क्या सुनना चाहती हो?   |   mahabharat अध्याय 13.155: विविध प्रकारके कर्मफलोंका वर्णन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.155.d108 
शुभाशुभं कृतं कर्म सुखदु:खफलोदयम्।
इति ते कथितं देवि भूय: श्रोतुं किमिच्छसि॥
 
 
अनुवाद
देवी! मनुष्य के अच्छे या बुरे कर्म ही उसे सुख या दुःख पहुँचाते हैं। यह मैंने तुम्हें बता दिया। अब तुम और क्या सुनना चाहती हो?
 
Devi! A man's good or bad deeds are what will bring him happiness or sorrow. I have told you this. What else do you want to hear?
 
(दाक्षिणात्य प्रतिमें अध्याय समाप्त)


 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)